आर्गेनिक मांड्या: जैविक खेती से किसानों की आय तीन गुना करने वाला स्टार्टअप

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दोस्तों, इस लेख के माध्यम से हम आपको जैविक खेती से किसानों की आय तीन-चार गुना करने वाले अनोखे स्टार्टअप ‘आर्गेनिक मांड्या’(Organic Mandya) के बारे में बतायेंगे. इस स्टार्टअप को राष्ट्रीय स्टार्टअप पुरस्कार-2020(National Startup Award-2020) से नवाजा जा चुका है. इस लेख में हम आपको आर्गेनिक मंड्या की सफलता की कहानी के साथ-साथ किसानों से जुड़े स्टार्टअप के काम करने के अनोखे तरीक़े से बारे में भी बतायेंगे. यदि आप भी जैविक तरीक़े से खेती कर सफल होना चाहते हैं तो आपसे अनुरोध है इस लेख को अंत तक अवश्य पढ़े.

आर्गेनिक मंड्या क्या है ?

यह एक ऐसा स्टार्टअप है जो किसानों को आत्मनिर्भर बनाने का काम कर रहा है. यह किसानों को रसायन मुक्त खेती से ज़्यादा से ज़्यादा लाभ अर्जित करने के लिए प्रेरित करता है. मंड्या किसान और उपभोक्ताओं के बीच की खाई को पटाने में भी मदद करता है. आर्गेनिक मंड्या एक अनोखा सुपरमार्किट है, जहां उपलब्ध सामान सीधे किसानों द्वारा पहुंचाया गया हैं.

आर्गेनिक मांड्या कैसे काम करता है

यह किसानों को बिना किसी बिचौलिया की मदद के फसल का दाम प्रदान करता है. किसानों के लिए अपनी फसल को यहां बेचना बहुत ही आसान है. किसान अपने उगाये हुए उत्पाद को आर्गेनिक मांड्या में ले जाता है और वहां अपने सामान को तोलता है और बिना किसी मोल भाव और रूकावट के अपने सामान को बेच देता है. आर्गेनिक मांड्या हाथो हाथ उस सामान के बदले वाजिब दाम किसान को देता है.यह पूरी प्रक्रिया मात्र 6 मिनट के अंदर पूरी हो जाती है, जिस वजह से किसान को अपनी मेहनत की कमाई को हासिल करने में ज़्यादा वक़्त और मेहनत नहीं करनी पड़ती है.

आर्गेनिक मांड्या का उद्देश्य

इसका का उद्देश्य जैविक खेती को बढ़ावा देना है. मंड्या की मदद से न केवल किसानों को उनके उत्पाद का ज़्यादा दाम  मिलता है, बल्कि शहरी लोग रसायन मुक्त उत्पादों का उपयोग करने से बचने में भी सफल होते हैं.

आर्गेनिक मंड्या का आईडिया

यह पेशे से आईटी इंजीनियर रहे मधु चन्दन चिक्कादेवय्या के दिमाग की उपज है. दरअसल मंड्या कर्नाटक का एक ज़िला है. मधु चन्दन इसी ज़िले के रहे वाले हैं. मंड्या की गिनती भारत के अमीर जिलों में होती है और इसे ‘शुगर सिटी’ के नाम से भी जाना जाता है जिसको कन्नड़ भाषा में सक्करे नगारा कहते हैं. मधु जब अमेरिका में काम करते थे तो अपने काम के सिलसिले में अकसर बैंगलोर आया करते थे. यहां उन्हें अपने गांव के लोगों से मिलने का मौक़ा मिलता था.

गांव के लोग उन्हें  मंड्या के हालातों के बारे में बताया करते थे, जिन्हें सुनकर मधु काफ़ी निराश होते थे. मधु जब उन लोगों से मंड्या छोड़ शहर में नौकरी करने का कारण पूछते, तो लोग उन्हें कर्ज में डूबे किसानों की आत्महत्या की कहानियां सुनाने लगते. इन बातों को सुनकर मंधु के मन में अपने गांव जाने की इच्छा जागी. इसके बाद जब मधु अपने गांव गए तो उन्होंने देखा सभी लोग खेती बाड़ी छोड़ दूसरे कम करने लगे हैं और गांव छोड़ शहरों की तरफ़ भाग रहे हैं. इसके पीछे का कारण जानने के लिए उन्होंने जब जांच पड़ताल शुरू की तो उन्हें पता चला कि किसानों के ऊपर 1200 करोड़ रुपये का कर्ज़ है. उन्हें समझ आ गया था किसान अकसर बीज और रासायनिक खादों के लिए कर्जा लेते हैं. तब उन्होंने सोचा क्यों न किसानों को जैविक खेती करने के लिए प्रेरित किया जाए.

आर्गेनिक मंड्या शुरुआत कैसे हुई

मधु विदेश से वापस लौटकर किसान बनना चाहते थे लेकिन किसानों की दुर्दशा देख उन्होंने किसानों की स्थति सुधारने का  निर्णय लिया. इसके बाद सबसे पहले मंधु ने मंड्या के किसानों को कर्ज से मुक्ति दिलाने पर विचार किया और मांड्या आर्गेनिक फार्मर्स को-ऑपरेटिव सोसाइटी का गठन किया.. सोसाइटी से जुड़ने के लिए किसानों को 1000 रुपये का शुल्क अदा करना होता था और इसके ऐवज में किसानों को सोसाइटी का मेम्बर बनाया जाता था. इसके बाद मधु ने किसानों को जैविक खेती करने में आधुनिक तरीकों के बारे में बताया जिससे किसानों को अधिक लाभ मिल सके.

मांड्या आर्गेनिक फार्मर्स को-ऑपरेटिव सोसाइटी का गठन

मधु ने 2014 में मांड्या मांड्या आर्गेनिक फार्मर्स को-ऑपरेटिव सोसाइटी शुरुआत की.  इसके ज़रिये मांड्या के किसानो को जैविक खेती से रूबरू कराया गया और यह आश्वासन दिलाया गया कि जैविक खेती के माध्यम से स्वास्थ्य और धन दोनों का लाभ होगा. यह सोसाइटी किसानों को फसल चक्र और मिलकर काम करने जैसी तकनीकों से जैविक खेती करना सीखाती है.

उन्होंने मंड्या को आर्गेनिक बनाने का आईडिया अपने चार आईटी दोस्तों के साथ शेयर किया. उनके दोस्तों को जैविक मंड्या का विचार काफ़ी पसंद आया. इसके बाद उन्होंने अपने दोस्तों एवं पूर्व सहयोगियों की मदद से 1 करोड़ की धन राशि इकट्ठा की. काफ़ी मेहनत करने के बाद भी शुरू में उनसे केवल 270 किसान ही जुड़ें, लेकिन इन किसानों को लाभ होता देख एक साल के भीतर ही यह आंकड़ा 350 के पार पहुंच गया. आज उनके साथ 500 से अधिक किसान जुड़ चके हैं. आज मांड्या के किसान 70 से अधिक किस्मों के उत्पादन कर रहे है जिसमें चावल, दाल, तेल, स्वास्थ्य सामग्री, मसाले के साथ कई अन्य उत्पाद भी शामिल हैं.

मांड्या आर्गेनिक फार्मर्स को-ऑपरेटिव सोसाइटी की अन्य योजनाएं

मांड्या आर्गेनिक फार्मर्स को-ऑपरेटिव सोसाइटी सिर्फ किसानों को ही खेती के नए तौर तरीके से परिचित नहीं करता बल्कि खेती से वंचित लोगो को भी जैविक खेती फायदों से रूबरू कराता है और इस प्रक्रिया को 2 भागों में बांटा गया है

(i) फार्म शेयर- इस योजना के तहत किसान अपने खेतों को तीन महीने के लिए किराए पर देते है जिसके बदले 35,000 का शुल्क निर्धारित किया गया है. जिस व्यक्ति को भी खेत किराए पर दिया जाता है वह खेत में जैविक उत्पाद उगाता है. फसल तैयार होने के बाद व्यक्ति की मर्जी होती है कि उसे अपनी फसल आर्गेनिक मांड्या में बेचनी है या खुद इस्तेमाल करनी है.

(ii) टीम फार्म- इस योजना में कोई भी संगठन अपने कर्मचारियों को एक दिन के लिए मांड्या में होने वाली जैविक खेती से रूबरू करा सकता है साथ ही कुछ ग्रामीण खेलों का आयोजन भी किया जाता है जिसमें कबड्डी, गिल्ली-डंडा जैसे खेल शामिल हैं. इस योजना का लाभ उठाने के लिए  मात्र 1300 रूपये शुल्क देना पड़ता है. उम्मीद है आर्गेनिक मंड्या की कहानी ने आपको जैविक खेती करने के लिए प्रेरित किया होगा.

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