एशिया का सबसे बड़ा ट्यूलिप गार्डन पर्यटकों के लिए खुला|asia’s largest tulip garden open for all

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एशिया के सबसे बड़े (asia’s largest tulip garden) को 25 मार्च से पर्यटकों के लिए खोल दिया जायेगा. ये गार्डन आने वाले एक महीने तक आम पर्यटकों के लिए खुला रहेगा.ट्यूलिप गार्डन कश्मीर के जबरवान पहाड़ियों की तलहटी और डल झील के किनारे पर स्थित है.यह गार्डन कुल 90 एकड़ के बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है,जिसमें 15 लाख से ज़्यादा ट्यूलिप के फूल और 62 ट्यूलिप की किस्में मौजूद हैं. ट्यूलिप के फूलों को सर्दी के मौसम के शुरू होने से पहले उगाया जाता है और ये अप्रैल के मध्य तक पूरी तरह खिल जाते हैं.

प्रधानमंत्री ने एशिया सबसे बड़े ट्यूलिप गार्डन घूमने की अपील की |Prime Minister appeals to visit Asia’s largest tulip garden

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 मार्च को ट्वीट कर देशवासियों से ट्यूलिप गार्डन घुमने की अपील की. उन्होंने कहा जब आपको मौका मिले जम्मू-कश्मीर घूमने जायें. ट्यूलिप समारोह लुफ्त उठाएं. इसके साथ उन्होंने बोला इसके माध्यम से जम्मू-कश्मीर का आतिथ्य का अनुभव भी करें.

गार्डन घुमने का सही समय

Tulip Garden घुमने का सही समय मार्च से अप्रैल के दौरान है. इस दौरान ट्यूलिप के फूल पूरी तरह से खिले हुए रहते हैं. ट्यूलिप के फूलों को शर्दी का मौसम शुरू होने से पहले उगाया जाता है. अप्रैल महीने में ट्यूलिप फेस्टिवल का भी आयोजन किया जाता है. सैलानी ट्यूलिप गार्डन घूमने के साथ ही ट्यूलिप फेस्टिवल का भी आनंद ले सकते हैं.

Asia’s largest tulip garden

पहले बगीचा घुमने के लिए पर्यटकों को टिकट लेने की ज़रूत होती थी. इसके बाद ही पर्यटक सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक गार्डन घूम सकते थे, लेकिन इस बार ऐसा नहीं है. सैलानी कभी भी ट्यूलिप गार्डन घुमने जा सकते हैं.

गार्डन प्रवेश शुल्क | Tulip Garden Entry Fee

बगीचा घूमने का प्रवेश शुल्क वयस्कों और बच्चों के लिए अलग-अलग था. युवाओं के लिए प्रवेश शुल्क 50 रुपये और बच्चों के लिए प्रवेश शुल्क 25 रुपये तय किया गया था, लेकिन पिछले साल कोरोना की मार के कारण यहां घूमना प्रतिबंधित था जिस कारण यहां कोई भी पर्यटक नहीं आया. जम्मू-कश्मीर सरकार ने गार्डन घूमने का कोई शुल्क तय नहीं किया है. इस बार पर्यटक मुफ़्त गार्डन घूम सकते हैं.

ट्यूलिप गार्डन का इतिहास | History of tulip garden srinagar

इसके पौधों की उत्त्पति फारस से हुई है जिसे वर्तमान समय में ईरान के नाम से जाना जाता है. इसके बाद17वीं शताब्दी में यह यूरोप में उगाया जाने लगा. जहां इसकी कई सारी किस्मों को विकसित किया गया. हॉलैंड दुनिया में सबसे ज्यादा ट्यूलिप के फूलों का उत्पादन करने वाला देश है. ट्यूलिप गार्डन श्रीनगर के लिए भी हॉलैंड से पौधें आयात किए गये हैं.

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